जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान पुलिसकर्मियों के कामकाज के तौर-तरीकों को लेकर एक बार फिर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। इस वायरल वीडियो में जेएलएन मार्ग पर हो रही भारी बारिश के बीच बस शेल्टर के नीचे शरण लिए खड़े आम राहगीरों और बाइक चालकों को पुलिसकर्मी कथित तौर पर धक्के देकर वहां से जबरन हटाते हुए नजर आ रहे हैं। शुरुआती दावों के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई केवल वीवीआईपी मूवमेंट के मद्देनजर सड़क मार्ग और उसके आसपास के इलाके को पूरी तरह खाली और सुरक्षित रखने के उद्देश्य से की गई थी, जिसके चलते आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

सोशल मीडिया पर फूटा आम जनता का गुस्सा, वीवीआईपी सुरक्षा के नाम पर आम नागरिकों के अधिकारों पर उठ रहे सवाल

जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर सामने आया, वैसे ही आम जनता और इंटरनेट यूजर्स का गुस्सा फूट पड़ा। वीडियो देखने के बाद लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सवाल उठाया कि क्या वीवीआईपी सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजामों के नाम पर भारी बारिश में भीग रहे बेकसूर आम नागरिकों को इस तरह खुले आसमान के नीचे खड़े रहने के लिए मजबूर कर दिया जाना न्यायसंगत है? नागरिकों का कहना है कि वीवीआईपी सुरक्षा व्यवस्था और कानून-पालन अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन आम जनता के साथ पेश आने का पुलिसिया तरीका मानवीय और संवेदनशीलता से परिपूर्ण होना चाहिए, न कि इस तरह का दमनकारी।

जगतपुरा के महल रोड पर ठेला पलटने की पुरानी घटना की याद ताजा, मोमोज संचालिका रेशु गुप्ता हुई थीं गंभीर रूप से झुलस

गौरतलब है कि यह कोई पहला ऐसा मामला नहीं है जब वीवीआईपी ड्यूटी और वीवीआईपी प्रोटोकॉल के क्रियान्वयन के दौरान जयपुर पुलिस की कार्रवाई कटघरे में आई हो। इससे कुछ समय पहले ही जगतपुरा के महल रोड पर राज्य के मुख्यमंत्री के काफिले के गुजरने के दौरान रास्ता खाली कराने की प्रक्रिया में एक गरीब महिला का मोमोज का ठेला पलटाए जाने की घटना ने पूरे प्रदेशभर में बड़ी सुर्खियां बटोरी थीं। पीड़ित ठेला संचालिका रेशु उर्फ खुशबू गुप्ता ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया था कि उसने खौलते हुए पानी को सुरक्षित तरीके से हटाने के लिए पुलिसकर्मियों से केवल दो मिनट का मोहलत मांगी थी, लेकिन आरोप था कि पुलिस ने उसकी एक नहीं सुनी और उसका ठेला पलट दिया, जिससे उखलते पानी की चपेट में आने से वह बुरी तरह झुलस गई थी। उस वक्त मामला तूल पकड़ने के बाद दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे लाइन हाजिर किया गया था।

वीवीआईपी प्रोटोकॉल और आम जनता के मानवीय अधिकारों के बीच संतुलन पर बहस तेज, पुलिस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

लगातार सामने आ रही इस तरह की वीवीआईपी केंद्रित घटनाओं ने राज्य में प्रशासनिक और पुलिसिया प्रोटोकॉल के क्रियान्वयन के तौर-तरीकों पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया से लेकर आम चौपालों तक यही चर्चा है कि आखिर सुरक्षा व्यवस्था की अनिवार्यताओं और आम नागरिकों के बुनियादी सम्मान व मानवीय अधिकारों के बीच एक सही संतुलन कैसे स्थापित किया जाए। फिलहाल, जेएलएन मार्ग पर सामने आए इस ताज़ा वायरल वीडियो को लेकर पुलिस विभाग के किसी भी उच्च अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे जनता में असमंजस और नाराजगी का माहौल बना हुआ है।