इंदौर,पुलिसकर्मियों पर जबरन घर में घुसने, धमकाने और मानसिक प्रताड़ना के आरोप प्रधान आरक्षक शशांक दुबे समेत अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग
इंदौर। पंचशील नगर, लोहामंडी निवासी विनायक शर्मा ने पुलिस आयुक्त को लिखित शिकायत देकर प्रधान आरक्षक शशांक दुबे एवं अन्य पुलिस अधिकारियों पर बिना वैधानिक प्रक्रिया के घर में घुसने, जबरन वाहन में बैठाने का प्रयास करने, गाली-गलौज, धमकी और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की वरिष्ठ अधिकारी से जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार घटना 20 मई 2026 को दोपहर करीब 1:40 बजे की बताई गई है। विनायक शर्मा का आरोप है कि एमपी-13 नंबर की कार से दो व्यक्ति उनके जे-26, पंचशील नगर स्थित घर पहुंचे। दोनों करीब 10 से 15 मिनट तक आसपास के लोगों से उनके संबंध में पूछताछ करते रहे और इसके बाद घर पहुंचे। शिकायत में बताया गया कि दोनों व्यक्तियों ने उनकी बहन से विनायक के बारे में जानकारी लेते हुए खुद का नाम, पद और विभाग बताने से इनकार किया। इसके बाद जब विनायक घर पहुंचे तो आरोप है कि दोनों में से एक व्यक्ति ने खुद को प्रधान आरक्षक शशांक दुबे बताया और बिना किसी नोटिस अथवा सक्षम अधिकारी के आदेश के उन्हें जबरन वाहन में बैठाने का प्रयास किया।
शिकायतकर्ता के मुताबिक घटना की जानकारी मिलने पर उन्होंने जूनी इंदौर क्षेत्र के टीआई को फोन किया। आरोप है कि इसके बाद भी उन्हें वाहन में बैठाकर करीब 30 मिनट तक अलग-अलग स्थानों पर घुमाया गया। इस दौरान गाली-गलौज, धमकी और मानसिक प्रताड़ना देने के आरोप लगाए गए हैं।
शिकायत में कथित तौर पर धमकी दिए जाने का भी उल्लेख है। विनायक शर्मा का आरोप है कि उन्हें डराया गया कि उनके खिलाफ ऐसी धाराएं लगाई जाएंगी कि वे जिंदगीभर जेल में सड़ेंगे। इसके बाद उन्हें राजेंद्र नगर थाने ले जाया गया, जहां शिकायतकर्ता ने तत्कालीन डीसीपी पर भी अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज और मारपीट के आरोप लगाए हैं।
विनायक शर्मा के अनुसार डीसीपी ने उनसे उनके समाचार पोर्टल ‘सावधान इंदौर’ पर तलवार से केक काटने वाले युवक की खबर प्रकाशित करने के संबंध में पूछताछ की। शिकायतकर्ता का दावा है कि खबर जनहित और पत्रकारिता के दायित्व के तहत प्रकाशित की गई थी, लेकिन उन्हें संबंधित युवक के राजनीतिक प्रभाव के कारण प्रताड़ित किए जाने की आशंका है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्हें गंभीर आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी दी गई तथा उनके साथ मौजूद सहयोगियों के साथ भी कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया। शिकायतकर्ता ने कहा कि घटना के बाद वह लगातार मानसिक तनाव और भय की स्थिति में हैं।
सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड और थाना रिकॉर्ड की जांच की मांग
विनायक शर्मा ने पुलिस आयुक्त से घटना की निष्पक्ष जांच के लिए घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड, थाना रिकॉर्ड तथा संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। साथ ही प्रधान आरक्षक शशांक दुबे के सेवा अभिलेख एवं पूर्व शिकायतों की भी जांच की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने दोषी पाए जाने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत विभागीय एवं दंडात्मक कार्रवाई, साथ ही स्वयं और परिवार को सुरक्षा दिए जाने की मांग की है। शिकायत के साथ घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, स्क्रीनशॉट और प्रकाशित खबर का स्क्रीनशॉट संलग्न किए जाने का उल्लेख है।
नोट: शिकायत में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के कथन पर आधारित हैं। संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद खबर में उसे भी प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।


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