देश भर में कॉर्पोरेट और कार्यालय आधारित रोजगार के मोर्चे पर एक सकारात्मक बदलाव देखा गया है। पिछले महीने देश की व्हाइट-कॉलर नौकरियों में सालाना आधार पर 14 प्रतिशत की ठोस वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें ऑटोमोबाइल, हेल्थकेयर और रिटेल क्षेत्रों का योगदान सबसे अहम रहा है।

व्हाइट-कॉलर नौकरियों में आई तेजी

विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले वर्ष अगस्त के मुकाबले इस बार मासिक जॉबस्पीक इंडेक्स 2,664 अंकों से बढ़कर 3,028 के स्तर पर पहुंच गया है। यह सूचकांक देश के कॉर्पोरेट बाजार में नियुक्तियों की स्थिति और भर्ती के रुझानों को ट्रैक करने का एक प्रमुख पैमाना माना जाता है।

प्रमुख क्षेत्रों में रोजगार के आंकड़े

विभिन्न उद्योगों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो ऑटोमोबाइल सेक्टर में नियुक्तियों में सबसे अधिक 19 प्रतिशत की तेजी आई है। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में 16 फीसदी और रिटेल सेक्टर में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अन्य क्षेत्रों का हाल इस प्रकार रहा:

  • बीमा सेक्टर: 12 प्रतिशत की वृद्धि

  • आईटी क्षेत्र: 11 प्रतिशत की वृद्धि

  • बैंकिंग और एफएमसीजी: 10-10 प्रतिशत की वृद्धि

  • बीपीओ, आईटीईएस, तेल-गैस और रियल एस्टेट: 8-8 प्रतिशत की वृद्धि

वहीं, फार्मा और बायोटेक सेक्टर में नियुक्तियों का ग्राफ स्थिर बना रहा। इसके विपरीत, हॉस्पिटैलिटी यानी आतिथ्य एवं यात्रा क्षेत्र में 4 प्रतिशत तथा शिक्षा क्षेत्र में 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। जानकारों का मानना है कि इस बार त्योहारी सीजन सितंबर में होने के कारण भी अगस्त के आंकड़ों पर इसका असर पड़ा है।

फ्रेशर्स और अनुभवी पेशेवरों के लिए अवसर

रोजगार बाजार में केवल वरिष्ठ पदों पर ही नहीं, बल्कि नए स्नातकों के लिए भी अच्छे मौके बने हैं। फ्रेशर्स की नियुक्तियों में सालाना आधार पर 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा विभिन्न अनुभव स्तरों पर भी मजबूत सुधार देखा गया है:

  • 4 से 7 वर्ष का अनुभव: 10 प्रतिशत की वृद्धि

  • 8 से 12 वर्ष का अनुभव: 16 प्रतिशत की वृद्धि

  • 13 से 16 वर्ष का अनुभव: 18 प्रतिशत की वृद्धि

  • 16 वर्ष से अधिक का अनुभव: 13 प्रतिशत की वृद्धि