दिल्ली | राष्ट्रीय राजधानी में मकान, फ्लैट या जमीन की खरीद-बिक्री करने वालों के लिए आने वाले दिनों में रजिस्ट्री कराना बेहद आसान हो सकता है। दिल्ली सरकार एक नई डिजिटल व्यवस्था लागू करने की योजना बना रही है, जिसके तहत लोगों को सब-रजिस्ट्रार दफ्तर के बार-बार चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। संपत्ति के पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया मोबाइल या लैपटॉप के माध्यम से ऑनलाइन पूरी की जा सकेगी।

घर बैठे पूरी होगी सत्यापन और डिजिटल हस्ताक्षर की प्रक्रिया

वर्तमान में संपत्ति पंजीकरण के लिए खरीदार और विक्रेता दोनों को दस्तावेज जांच और पहचान सत्यापन के लिए कार्यालय जाना पड़ता है। प्रस्तावित ऑनलाइन व्यवस्था में सबसे पहले सभी कागजात वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे। प्रणाली स्वतः जांच करेगी कि संपत्ति पर कोई कानूनी विवाद तो नहीं है। क्लीयरेंस मिलने के बाद तय समय पर मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए पहचान सत्यापन, फोटो और डिजिटल सिग्नेचर की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अंत में सब-रजिस्ट्रार डिजिटल हस्ताक्षर करेंगे और दस्तावेज सीधे डिजिटल लॉकर में उपलब्ध करा दिए जाएंगे।

पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम

प्रशासन का मानना है कि इस कदम से नागरिकों के समय और पैसों की बचत होगी। दफ्तरों में प्रत्यक्ष संपर्क खत्म होने से कार्यों में पारदर्शिता आएगी और रिश्वतखोरी जैसी शिकायतों पर प्रभावी रोक लगेगी। हालांकि, इस व्यवस्था को जमीनी स्तर पर लागू करने से पहले कैबिनेट की मंजूरी और आवश्यक कानूनी संशोधन किए जाएंगे।

छोटे प्लॉटों के एकीकरण और डीडीए के डिजिटल प्लेटफॉर्म के नियम

मास्टर प्लान-2021 के तहत दो छोटे आवासीय भूखंडों को जोड़कर अधिकतम 64 वर्ग मीटर तक का संयुक्त प्लॉट बनाने की अनुमति है, जबकि बड़े आवासीय भूखंडों को आपस में जोड़ने का प्रावधान नहीं है। वहीं ग्रुप हाउसिंग के पुनर्विकास के लिए न्यूनतम 3000 वर्ग मीटर का दायरा निर्धारित है। इसके साथ ही डीडीए का जीआईएस (GIS) आधारित प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध है, जहां जमीन का लेआउट और इस्तेमाल संबंधी जानकारी डिजिटल रूप से देखी जा सकती है।