पेट्रोल भरवाने से पहले जांचा जा सकता है वाहन का बीमा, जानें क्या है नई व्यवस्था
भोपाल | वाहन चालकों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी खबर सामने आ रही है। अमूल्य रूप से जब भी आप अपनी गाड़ी में ईंधन डलवाने पेट्रोल पंप जाते हैं, तो कर्मचारी सीधे टैंक में नोजल लगाकर पेट्रोल या डीजल भर देता है और भुगतान कर आप रवाना हो जाते हैं। लेकिन आने वाले दिनों में यह प्रक्रिया बदलने जा रही है। मध्य प्रदेश में सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करवाने के लिए एक अनूठा और सख्त कदम उठाया जा रहा है। यदि आपके दोपहिया या चारपहिया वाहन का बीमा (इंश्योरेंस) नहीं है, तो आपको पेट्रोल पंप से खाली हाथ लौटना पड़ सकता है।
बीमा नहीं तो ईंधन नहीं: राज्य सरकार शुरू करने जा रही है पायलट प्रोजेक्ट
नए प्रस्तावित नियमों के अनुसार, यदि किसी वाहन का वैध बीमा नहीं पाया जाता है, तो उसे पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा। इस अभिनव नियम को धरातल पर उतारने के लिए राज्य सरकार जल्द ही एक पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत करने जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह अहम निर्णय उच्चतम न्यायालय की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे की अध्यक्षता में मुख्य सचिव कार्यालय में संपन्न हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान लिया गया है।
ऑटोमैटिक कैमरों से होगी वाहनों की निगरानी
इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रदेश के सभी पेट्रोल पंपों पर विशेष हाई-टेक कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों को सीधे केंद्रीय परिवहन विभाग के 'वाहन' (VAHAN) पोर्टल के डेटाबेस के साथ जोड़ा जाएगा। जैसे ही कोई वाहन ईंधन भरवाने के लिए पंप पर पहुँचेगा, ये कैमरे स्वतः ही गाड़ी की नंबर प्लेट को स्कैन कर लेंगे। यदि सिस्टम में वाहन का बीमा समाप्त (फेल) पाया जाता है, तो संबंधित वाहन को पेट्रोल या डीजल देने से मना कर दिया जाएगा। इस नियम की शुरुआत सबसे पहले उन जिलों से की जाएगी जहाँ बिना बीमा वाले वाहनों का पंजीकरण सबसे अधिक है।
परियोजना को जल्द अमलीजामा पहनाने के निर्देश
सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त जस्टिस अभय मनोहर सप्रे ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ विमर्श कर इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द जमीन पर उतारा जाए। शुरुआती चरण में इसकी टेस्टिंग (परीक्षण) की जाएगी और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के अन्य जिलों में भी अनिवार्य रूप से लागू कर दिया जाएगा।


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