UPI फ्रॉड से बचने का आसान तरीका, बचत और खर्च के लिए रखें अलग-अलग खाते
भारत में डिजिटल क्रांति ने लेनदेन की व्यवस्था को पूरी तरह से नया रूप दे दिया है। जेब में कैश की जगह अब स्मार्टफोन और क्यूआर कोड ने ले ली है। हालांकि, इस बड़ी सहूलियत के साथ एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि साइबर ठगों के लिए वारदातों का दायरा काफी बढ़ गया है।
वित्तीय धोखाधड़ी के आंकड़े इस खतरे की भयावाहता को स्पष्ट रूप से बयां करते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अप्रैल से नवंबर के बीच यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के माध्यम से 805 करोड़ रुपये की ठगी के 10.64 लाख से अधिक मामले सामने आए। ये आंकड़े बताते हैं कि चूक तकनीक की कमियों से ज्यादा हमारे वित्तीय प्रबंधन और थोड़ी सी लापरवाही के कारण हो रही है।
खर्च खाता और बचत खाता अलग रखना क्यों जरूरी?
वर्तमान समय में सबसे बड़ी भूल यह की जा रही है कि लोग एक ही बैंक खाते में अपनी सैलरी ले रहे हैं, उसी में अपनी जीवनभर की बचत और आपातकालीन फंड रख रहे हैं, और उसी खाते को यूपीआई से जोड़कर हर जगह भुगतान कर रहे हैं।
डिजिटल दौर में आर्थिक सुरक्षा की पहली शर्त है, अपने पैसों के बीच एक मजबूत सुरक्षा चक्र तैयार करना। यदि आपका मुख्य बचत खाता सीधे यूपीआई से लिंक्ड है, तो किसी फिशिंग लिंक, फर्जी कॉल या अवैध ट्रांजैक्शन की स्थिति में पूरा खाता खाली होने का खतरा रहता है। यदि आप यूपीआई के इस्तेमाल के लिए केवल एक अलग खाता (ट्रांजैक्शन या खर्च खाता) रखते हैं और उसमें अमूमन 5,000 से 10,000 रुपये तक ही राशि रखते हैं, तो किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में आपका वित्तीय नुकसान बहुत सीमित रहेगा।
जब एक ही बैंक खाते में बड़ी रकम नजर आती है, तो छोटे-छोटे डिजिटल भुगतानों का अहसास नहीं होता और अनचाहे खर्चे बढ़ने लगते हैं। एक अलग खाते में हर महीने का एक निश्चित बजट तय करने से, बैलेंस खत्म होते ही खर्च की सीमा का तुरंत अंदाजा लग जाता है।
इसके अलावा, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, बीमा प्रीमियम या यूटिलिटी बिलों के ऑटो-डेबिट मैंडेट अक्सर मुख्य खाते में छिपे रहते हैं। खर्च वाले खाते से जुड़े होने पर आप आसानी से नजर रख सकते हैं कि कौन-सा सब्सक्रिप्शन चलाना है और किसे बंद करना है।
कैसे तैयार करें दो खातों वाला सुरक्षित मॉडल?
| खाते का प्रकार | मुख्य उद्देश्य | सुरक्षा नियम |
| मुख्य खाता | इमरजेंसी फंड, लंबी अवधि की बचत, निवेश, एफडी |
• किसी भी UPI ऐप से लिंक न करें • इसका डेबिट कार्ड अपने साथ न रखें • केवल सुरक्षित नेट बैंकिंग से ही नियंत्रित करें |
| खर्च खाता | दैनिक खरीदारी, बिल भुगतान, ऑनलाइन ऑर्डर, ऑटोपे |
• UPI ऐप्स से जोड़ें • बैलेंस ₹5,000 से ₹10,000 के बीच रखें • जरूरत पड़ने पर ही मुख्य खाते से इसमें पैसे ट्रांसफर करें |
डिजिटल सुरक्षा के 10 जरूरी नियम
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किसी से पैसे प्राप्त करने के लिए कभी भी यूपीआई पिन दर्ज नहीं करना पड़ता है। पिन की जरूरत केवल पैसे भेजने के वक्त होती है।
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अपने मुख्य बचत खाते को डिजिटल भुगतान एप्स से पूरी तरह अलग रखें।
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खुद को बैंक अधिकारी, पुलिसकर्मी या कस्टमर केयर बताने वाले किसी भी कॉलर को अपना ओटीपी, पासवर्ड या सीवीवी कभी साझा न करें।
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लॉटरी लगने, कैशबैक मिलने या पुराना सामान खरीदने/बेचने के बहाने भेजे गए किसी भी अनजान क्यूआर कोड को स्कैन करने से बचें।
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किसी के कहने पर एनीडेस्क जैसे स्क्रीन-शेयरिंग ऐप्स या व्हाट्सएप पर प्राप्त किसी भी अनजान एपीके फाइल को इंस्टॉल न करें।
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यूपीआई एप पर भुगतान करने से पहले स्क्रीन पर दिखाई दे रहे मर्चेंट या प्राप्तकर्ता के नाम और राशि की अच्छी तरह जांच कर लें।
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बैंकिंग और पेमेंट ऐप्स हमेशा आधिकारिक गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से ही डाउनलोड या अपडेट करें।
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महीने में कम से कम एक बार अपने यूपीआई एप की सेटिंग्स में जाकर ऑटोपे या मैंडेट्स सेक्शन की जांच करें और गैर-जरूरी ऑटो-डेबिट तुरंत रद्द करें।
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रेलवे स्टेशन, होटल या कैफे जैसे सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क से कनेक्ट होकर कभी भी बैंकिंग एप या यूपीआई का उपयोग न करें।
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किसी भी प्रकार का अनधिकृत लेनदेन होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें, cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं और अपने बैंक को सूचित करके खाता तत्काल ब्लॉक करवाएं।


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