यशवीर सिंह ने जीता कांस्य, नीरज चोपड़ा ने तारीफ के साथ सुनाया 2023 एशियन गेम्स का किस्सा
ग्लास्गो| स्कॉटलैंड के ग्लास्गो शहर में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की पुरुषों की जैवलिन थ्रो (भाला फेंक) स्पर्धा में भारत के खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए दोहरी सफलता हासिल की है। श्रीलंका के स्टार खिलाड़ी रुमेश पाथिरागे ने 89.75 मीटर के बेहतरीन थ्रो के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं, भारत के दिग्गज खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के शानदार थ्रो के साथ रजत पदक जीता, जबकि युवा भारतीय एथलीट यशवीर सिंह ने अपने मुकाबले के अंतिम और निर्णायक प्रयास में 85.41 मीटर का अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ (पर्सनल बेस्ट) प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक पर कब्जा जमा लिया। हालांकि, इस रोमांचक मुकाबले के बाद सबसे अधिक चर्चा भारतीय स्टार नीरज चोपड़ा के उस बयान की रही, जिसमें उन्होंने अपनी इस उपलब्धि से ज्यादा युवा साथी यशवीर सिंह के शानदार प्रदर्शन को अधिक महत्वपूर्ण बताया।
'यशवीर के साथ पोडियम साझा करना मेरे लिए एक अद्भुत अनुभव था'
दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि युवा खिलाड़ी यशवीर सिंह के साथ विजय मंच (पोडियम) साझा करना उनके करियर के सबसे खास पलों में से एक है। उन्होंने कहा कि इन परिणामों से यह साफ जाहिर होता है कि आने वाले समय में भारतीय जैवलिन थ्रो का भविष्य बेहद सुरक्षित और मजबूत हाथों में है।
नीरज ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा, "मुझे साल 2023 में हुए एशियाई खेलों की याद आ गई, जब मैंने और किशोर जेना दोनों ने मिलकर देश के लिए पदक जीते थे। इस बार यशवीर ने सबसे अधिक दबाव वाले और अहम समय पर अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। इस कठिन और चुनौतीपूर्ण मौसम के बावजूद मैंने भी अपने इस सत्र (सीजन) का बेस्ट प्रदर्शन दिया है, जिससे मुझे यह विश्वास हो गया है कि मेरी फिटनेस और खेल की वापसी बिल्कुल सही दिशा में आगे बढ़ रही है।"
आखिरी प्रयास के जादू ने पूरी तरह पलट दी यशवीर की किस्मत
इस प्रतिष्ठित कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना शानदार डेब्यू कर रहे यशवीर सिंह ने इस प्रतियोगिता का सबसे रोमांचक और यादगार पल अपने नाम कर दिखाया। शुरुआती पांच प्रयासों तक वह पदक की दौड़ से काफी पीछे नजर आ रहे थे, लेकिन अपने छठे और अंतिम थ्रो में उन्होंने अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए 85.41 मीटर की दूरी तय की और सीधे कांस्य पदक पर अपना अधिकार जमा लिया।
इस जादुई थ्रो के साथ ही उन्होंने अपने पुराने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (83.72 मीटर) को पीछे छोड़ दिया। इस दमदार प्रदर्शन के दम पर यशवीर ने ग्रेनाडा के पूर्व विश्व चैंपियन एंडरसन पीटर्स और पाकिस्तान के ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम जैसे दिग्गज और अनुभवी खिलाड़ियों को भी पछाड़कर सबको हैरान कर दिया।
'मैंने अंतिम मौके पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी'
युवा पदक विजेता यशवीर सिंह ने अपने इस सफर के बारे में बात करते हुए बताया कि उनके शुरुआती पांचों थ्रो उनकी उम्मीद के मुताबिक बिल्कुल अच्छे नहीं रहे थे, लेकिन अंतिम प्रयास में उन्होंने मानसिक रूप से सब कुछ दांव पर लगाने का फैसला किया।
यशवीर ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, "शुरुआत में मेरे भाले की दूरी करीब 81 मीटर तक ही सिमट रही थी। जब मैंने स्कोरबोर्ड पर देखा कि कांस्य पदक के लिए लगभग 82 मीटर की दूरी की जरूरत है, तब मैंने अपने आप से कहा कि मैं इससे बहुत आगे फेंक सकता हूं। पहले पांच प्रयास भले ही मनमुताबिक न रहे हों, लेकिन अंतिम मौके पर मैंने अपनी पूरी ऊर्जा झोंक दी और वही थ्रो मुझे मेरा पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय पदक दिला गया।"
हरियाणा की माटी से निकला भारतीय एथलेटिक्स का नया सितारा
मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले युवा एथलीट यशवीर सिंह ने सबसे पहले वर्ष 2022 में उस वक्त सबका ध्यान अपनी ओर खींचा था, जब उन्होंने इंडियन अंडर-20 फेडरेशन कप के दौरान देश के स्टार जैवलिन स्टार नीरज चोपड़ा का पुराना मीट रिकॉर्ड तोड़ दिया था। इसी प्रतियोगिता में उन्होंने अपने करियर में पहली बार 80 मीटर के आंकड़े को पार किया था।
इसके बाद, साल 2025 की एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 82.57 मीटर के अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ पांचवां स्थान हासिल किया था। इसके अलावा, ताशकंद में आयोजित जी. अर्जुमानोव मेमोरियल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी। अब ग्लास्गो के इस मंच पर कॉमनवेल्थ गेम्स का कांस्य पदक अपने नाम कर यशवीर ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय जैवलिन थ्रो को अब नीरज चोपड़ा के बाद एक और विश्व स्तरीय और मजबूत दावेदार मिल चुका है।


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