संक्रामक बीमारियां वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लगातार एक बड़ा और अतिरिक्त बोझ बनती जा रही हैं। यह बीमारियां दुनिया भर में लाखों लोगों की अकाल मृत्यु का प्रमुख कारण भी बनती हैं। हालांकि, चिंता तब और अधिक बढ़ जाती है जब कोई व्यक्ति किसी खतरनाक वायरस से संक्रमित हो, लेकिन उसे इस बात की भनक तक न हो कि उसका शरीर इस संक्रमण की चपेट में आ चुका है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में इसी गंभीर मुद्दे को उठाते हुए हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस (HSV-1) को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि वर्तमान में दुनिया भर में अरबों लोग इस वायरस के साथ अपना जीवन जी रहे हैं। सबसे डराने वाली बात यह है कि इनमें से एक बहुत बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन्हें यह तक नहीं पता कि उनके शरीर में यह वायरस चुपचाप मौजूद है। इस संक्रमण को लेकर समाज में फैली एक बड़ी गलतफहमी यह भी है कि लोग अक्सर हर्पीज का नाम सुनते ही इसे केवल यौन संबंधों से जुड़ी बीमारी मान लेते हैं, जबकि वास्तविकता इससे काफी अलग है।

करोड़ों लोग हैं हर्पीज के संक्रमण की चपेट में

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, 50 वर्ष से कम उम्र के लगभग 3.8 अरब लोग एचएसवी-1 वायरस से संक्रमित हैं, जो कि वैश्विक आबादी का लगभग 64 प्रतिशत हिस्सा है। इसके अलावा, 15 से 49 वर्ष की आयु के लगभग 52 करोड़ लोगों (करीब 13 प्रतिशत आबादी) में एचएसवी-2 वायरस का संक्रमण पाया गया है।

  • एचएसवी-1 (HSV-1): यह वायरस मुख्य रूप से मुंह या होंठों के आसपास होने वाले हर्पीज (कोल्ड सोर्स) का कारण बनता है। डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक, इस वायरस से पीड़ित कुल लोगों में से करीब 37.6 करोड़ (10 प्रतिशत) मामलों में यह संक्रमण जननांगों तक में पाया गया है।

  • एचएसवी-2 (HSV-2): यह मुख्य तौर पर यौन संबंधों के माध्यम से फैलता है और जननांगों में होने वाले हर्पीज के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार माना जाता है। महिलाओं में यह संक्रमण पुरुषों की तुलना में लगभग दोगुना अधिक देखा जाता है।

लोग क्यों रह जाते हैं इस संक्रमण से पूरी तरह अनजान?

हर्पीज के इतनी तेजी से फैलने और इसके मरीजों के इससे अनजान बने रहने का सबसे बड़ा कारण यह है कि अधिकांश संक्रमित व्यक्तियों में इसके शुरुआती लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते हैं। कई बार शरीर पर कोई बाहरी छाला या घाव नजर न आने के बावजूद यह वायरस आसानी से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। यानी एक संक्रमित व्यक्ति अनजाने में ही अपने पार्टनर को इस संक्रमण का शिकार बना देता है। जिन लोगों में लक्षण प्रकट होते हैं, उन्हें उस स्थान पर हल्की झुनझुनी, जलन या खुजली महसूस होती है, जिसके बाद वहां दर्दनाक और पानी भरे फफोले उभर आते हैं।

शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है यह वायरस

चिकित्सकीय रिपोर्ट्स बताती हैं कि हालांकि ज्यादातर मामलों में हर्पीज जानलेवा साबित नहीं होता, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में यह गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं पैदा कर सकता है। इसका असर शरीर के विभिन्न अंगों पर अलग-अलग रूपों में दिखाई दे सकता है:

  • मुंह और चेहरे पर: ओरल हर्पीज के कारण होंठों और मुंह के आसपास छाले हो जाते हैं। पहली बार संक्रमण होने पर मुंह के अंदर छाले (जिंजिवोस्टोमाटाइटिस) की समस्या हो सकती है।

  • जननांगों पर: जेनिटल हर्पीज के कारण प्राइवेट पार्ट्स के हिस्से में दर्दनाक छाले बन जाते हैं।

  • त्वचा और उंगलियां: यह वायरस उंगलियों (हर्पेटिक विटलो) या शरीर की किसी भी त्वचा को संक्रमित कर सकता है। इसके अलावा आंखों में होने वाला 'हर्पीज केराटाइटिस' संक्रमण दृष्टि के लिए भी खतरनाक हो सकता है।

  • मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र: अत्यंत दुर्लभ और गंभीर मामलों में यह मस्तिष्क (एन्सेफलाइटिस) या रीढ़ की हड्डी के आसपास की सुरक्षात्मक परतों को संक्रमित कर सकता है, जिससे जानलेवा स्थितियां बन सकती हैं।

इस संक्रमण से बचाव के लिए क्या सावधानियां जरूरी हैं?

चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि कुछ बुनियादी सावधानियों को अपनाकर हर्पीज के संक्रमण और उसके फैलने के खतरे को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है:

  • यदि किसी व्यक्ति के मुंह या जननांगों के आसपास सक्रिय छाले या घाव हैं, तो उनके पूरी तरह ठीक होने तक शारीरिक नजदीकियां बनाने से बचना चाहिए।

  • सुरक्षित यौन संबंधों के नियमों का कड़ाई से पालन करें और व्यक्तिगत सामान जैसे तौलिया, रेजर, टूथब्रश या लिप बाम दूसरों के साथ साझा करने से पूरी तरह परहेज करें।

  • अपनी जीवनशैली में सुधार करते हुए पर्याप्त नींद लें, संतुलित और पौष्टिक आहार का सेवन करें तथा मानसिक तनाव को कम करें ताकि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) मजबूत बनी रहे।

  • यदि शरीर पर किसी भी प्रकार के संदिग्ध लक्षण दिखाई दें, तो किसी भी प्रकार की झिझक या डर को मन से निकालकर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और उचित चिकित्सीय सलाह लें।