इंदौर में RTI के कथित दुरुपयोग पर उठे सवाल, विभागों में बढ़ा कामकाज का दबाव
इंदौर। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया है, लेकिन इंदौर में इसके कथित दुरुपयोग को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। विभिन्न सरकारी विभागों में कुछ व्यक्तियों द्वारा एक ही विषय से जुड़े बड़ी संख्या में RTI आवेदन लगाए जा रहे हैं, जिससे विभागीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं और अधिकारियों पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
सूत्रों के अनुसार, शहर में विशेष रूप से बिल्डिंग परमिशन, अवैध निर्माण और नगर निगम से जुड़े मामलों में लगातार बड़ी संख्या में RTI आवेदन प्राप्त हो रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक कुछ अधिकारियों का दावा है कि इन आवेदनों का उपयोग कथित रूप से दबाव बनाने या समझौते के प्रयासों के लिए भी किया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि किसी सक्षम जांच एजेंसी या न्यायालय द्वारा नहीं हुई है। इस पूरे मामले में कई महत्वपूर्ण सवाल भी उठ रहे हैं। क्या किसी विभाग ने कथित दुरुपयोग की शिकायत पुलिस या वरिष्ठ अधिकारियों से की है? क्या कथित ब्लैकमेल या अवैध वसूली से जुड़े मामलों में कोई एफआईआर दर्ज हुई है? क्या ऐसे मामलों से संबंधित न्यायालयीन रिकॉर्ड उपलब्ध हैं? इन सवालों के स्पष्ट जवाब अभी सामने नहीं आए हैं।
विभागीय अधिकारियों का मानना है कि वास्तविक जनहित में सूचना मांगने वाले RTI कार्यकर्ताओं और कानून का कथित दुरुपयोग करने वाले लोगों के बीच अंतर करना आवश्यक है। यदि किसी व्यक्ति द्वारा सूचना के अधिकार का उपयोग अनुचित उद्देश्य से किया जा रहा है, तो ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। गौरतलब है कि विभिन्न मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट भी सूचना के अधिकार के संभावित दुरुपयोग पर चिंता जता चुका है। हालांकि न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ मामलों के आधार पर पूरे RTI आंदोलन या ईमानदारी से कार्य करने वाले RTI कार्यकर्ताओं की भूमिका पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।


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