आप-कांग्रेस ने सरकार से पूछे सवाल, ₹2500 सहायता राशि पर बढ़ी सियासत
नई दिल्ली: राजधानी में प्रदेश सरकार की नई 'दिल्ली लक्ष्मी योजना' को लेकर सियासी सरगर्मी काफी तेज हो गई है, जहां एक ओर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी इसे महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में उठाया गया ऐतिहासिक कदम बता रही है, तो वहीं दूसरी ओर विपक्ष इस योजना की पात्रता शर्तों को लेकर लगातार हमलावर है।
आम आदमी पार्टी द्वारा योजना की शर्तों पर कड़ा प्रहार
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने प्रेस वार्ता कर सरकार पर गंभीर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है, जिसमें उन्होंने कहा कि चुनाव के समय हर महिला को वित्तीय सहायता देने का वादा किया गया था, लेकिन अब निवास, बिजली खपत और बच्चों की संख्या जैसी कठिन शर्तें थोपकर अधिकांश महिलाओं को इस लाभ से वंचित किया जा रहा है।
भाजपा नेताओं ने बताया महिलाओं के सशक्तिकरण का माध्यम
इन सभी आरोपों का खंडन करते हुए पश्चिमी दिल्ली की सांसद कमलजीत सहरावत, नई दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज और प्रदेश प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने योजना का पुरजोर बचाव किया है, और इसे प्रधानमंत्री के महिला-नेतृत्व वाले विकास के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने वाला कदम बताते हुए स्पष्ट किया कि इससे शुरुआती चरण में 17 लाख से अधिक पात्र महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा।
कांग्रेस पार्टी ने उपराज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर शर्तें हटाने की मांग की
इस राजनीतिक गहमागहमी के बीच कांग्रेस पार्टी ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू को एक ज्ञापन प्रेषित किया है, जिसमें यह मांग की गई है कि योजना में जोड़ी गई तमाम जटिल शर्तों को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए ताकि बिना किसी भेदभाव के सभी जरूरतमंद महिलाओं को चुनावी वादे के अनुरूप पूरी सहायता राशि मिल सके।


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